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हिन्दुस्तानी प्रचार सभा

Hindustani Prachar Sabha

Gandhi

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हिन्दुस्तानी ज़बान

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हिन्दुस्तानी ज़बान (ब्रेल)

हिन्दुस्तानी भाषा का प्रचार-प्रसार करने के लिए हिन्दुस्तानी प्रचार सभा ने दृष्टिहीन पाठकों के लिए हिन्दुस्तानी बान पत्रिका का प्रकाशन ब्रेल लिपि में शुरू किया गया है। ब्रेल पत्रिका के माध्यम से हिन्दुस्तानी प्रचार सभा देश के सभी नेत्रहीन सदस्यों तक पहुँचना चाहती है।   DOWNLOAD/LISTEN  

हिन्दुस्तानी के प्रचार-प्रसार में अग्रणी संस्था ‘हिन्दुस्तानी प्रचार सभा’ की स्थापना सन् 1942 में महात्मा गाँधी ने की थी। हिन्दुस्तानी (सरल हिन्दी) के साथ-साथ गाँधीजी के उसूलों के प्रचार-प्रसार में भी यह संस्था कार्यरत है।

‘हिन्दुस्तानी प्रचार सभा’ एक संस्था ही नहीं, एक विश्वास है, वह प्रतीक है ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘सर्वधर्म समभाव’ का। यह संस्था राष्ट्रीय एकता से जुड़ा हुआ एक इरादा है, जिसे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने ठोस आकार प्रदान किया।

इस संस्था को डॉ. राजेंद्र प्रसाद, मौलाना अबुलकलाम आज़ाद, पंडित जवाहरलाल नेहरू, डॉ. ज़ाकिर हुसैन, आचार्य काकासाहेब कालेलकर, श्री बाला साहेब खेर, डॉ. ताराचंद, डॉ. ज़ाफर हसन, प्रो. नजीब अशरफ नदवी, श्री श्रीमन्नारायण अग्रवाल, श्रीमती पेरीन बहन कैप्टन, श्रीमती गोशीबहन कैप्टन, पंडित सुन्दरलाल, पंडित सुदर्शन, श्री सीताराम सेक्सरिया, श्री अमृतलाल नानावटी, श्री देवप्रकाश नायर जैसी बड़ी-बड़ी हस्तियों का सहयोग मिला।

आचार्य काकासाहेब कालेलकर और श्री अमृतलाल नानावटी ने अहमदाबाद, वर्धा और दिल्ली को केन्द्र बनाकर अपना काम जारी रखा और श्रीमती पेरीन बहन कैप्टन ने बम्बई (मुंबई) को चुना तथा महात्मा गाँधी के भाषायी मिशन को कामयाब बनाने की कोशिश में वह लग गयी।

हिन्दुस्तानी के प्रचार-प्रसार में अग्रणी संस्था ‘हिन्दुस्तानी प्रचार सभा’ की स्थापना सन् 1942 में महात्मा गाँधी ने की थी। हिन्दुस्तानी (सरल हिन्दी) के साथ-साथ गाँधीजी के उसूलों के प्रचार-प्रसार में भी यह संस्था कार्यरत है।

‘हिन्दुस्तानी प्रचार सभा’ एक संस्था ही नहीं, एक विश्वास है, वह प्रतीक है ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘सर्वधर्म समभाव’ का। यह संस्था राष्ट्रीय एकता से जुड़ा हुआ एक इरादा है, जिसे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने ठोस आकार प्रदान किया। इस संस्था को डॉ. राजेंद्र प्रसाद, मौलाना अबुलकलाम आज़ाद, पंडित जवाहरलाल नेहरू, डॉ. ज़ाकिर हुसैन, आचार्य काकासाहेब कालेलकर, श्री बाला साहेब खेर, डॉ. ताराचंद, डॉ. ज़ाफर हसन, प्रो. नजीब अशरफ नदवी, श्री श्रीमन्नारायण अग्रवाल, श्रीमती पेरीन बहन कैप्टन, श्रीमती गोशीबहन कैप्टन, पंडित सुन्दरलाल, पंडित सुदर्शन, श्री सीताराम सेक्सरिया, श्री अमृतलाल नानावटी, श्री देवप्रकाश नायर जैसी बड़ी-बड़ी हस्तियों का सहयोग मिला। आचार्य काकासाहेब कालेलकर और श्री अमृतलाल नानावटी ने अहमदाबाद, वर्धा और दिल्ली को केन्द्र बनाकर अपना काम जारी रखा और श्रीमती पेरीन बहन कैप्टन ने बम्बई (मुंबई) को चुना तथा महात्मा गाँधी के भाषायी मिशन को कामयाब बनाने की कोशिश में वह लग गयी।

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  2. Little Red Riding Hood
  3. Hansel and Gretel
  • Actual Price : Rs. 375/-
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022 – 2281 2871/2281 0126/2281 1885

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Dictionary

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WHAT'S NEW
आशुभाषण प्रतियोगिता

दिनांक 7-2-2019 को हिन्दुस्तानी प्रचार सभा द्वारा आयोजित सरल हिन्दी पाठ्यक्रम के विभिन्न कॉलेजों और केन्द्र के तीस विद्यार्थियों ने आशुभाषण प्रतियोगिता में भाग लिया। अपने समापन भाषण में डॉ. सुशीला गुप्ता ने कहा कि तीन मिनट की परीक्षा दरअसल ज़िन्दगी का इम्तहान है, जिसमें हमें अनेक परिस्थितियों में अपनी बात रखनी पड़ती है। ज़रूरी नहीं कि हमेशा तैयारी का म़ौका मिले। प्रतियोगिता में विक्रम विश्वकर्मा (सोमैया कॉलेज) को प्रथम, शब्बो ख़ान (सोफिया कॉलेज) को द्वितीय, आकांक्षा चौबे (श्ऱॉफ कॉलेज) को तृतीय और सुप्रिया गांवकर (हिन्दुस्तानी प्रचार सभा) तथा अन्नू सोनी (खालसा कॉलेज) को प्रोत्साहन पुरस्कार से नवाज़ा गया। प्रथम पुरस्कार विजेता विक्रम विश्वकर्मा के वक्तव्य को सभी प्रतिभागियों और दर्शको द्वारा बहुत सराहा गया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किये गये। श्री राजेन्द्र रावत, श्री सरोज त्रिपाठी और श्रीमती संध्या पाण्डेय ने निर्णायक की भूमिका निभायी । श्रीमती रोहिणी आचरेकर ने कार्यक्रम का संचालन किया और जनाब सैयद अली अब्बास ने आभार-प्रदर्शन किया। 'सभा' के सहकर्मियों के सक्रिय सहयोग से कार्यक्रम सफल रहा। 16-2-2019 को 'हिन्दुस्तानी प्रचार सभा' द्वारा (मानव विकास मंत्रालय, नई दिल्ली के सहयोग से) प्रचारक शिविर संपन्न हुआ। 'सभा' की विशेष कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुशीला गुप्ता ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि महात्मा गाँधी चाहते थे कि हम 'हिन्दुस्तानी' का मतलब आसान हिन्दी व उर्दू सभी सीखें। शिविर में उन्होंने बताया कि शिक्षकों की भी प्रतिबद्धता महत्त्वपूर्ण होती है। उनको विद्यार्थियों का जीवन सँवारना होता है। विद्यार्थियों को यकीन दिलाना होता है कि उनका भविष्य सही हाथों में है। अल़फलाह हाईस्कूल, मलाड के प्रिंसिपल ज़नाब मोहम्मद ताहिर शाह ने कहा कि शिक्षण-व्यवस्था शिक्षकों के लिए एक मिशन है, प्रोफेशन नहीं है। इसमें हमें तब्दीली ज़रूर करनी चाहिए। साथ-साथ नयी पीढ़ी में जज़्बा कायम रखने की कोशिश भी करनी चाहिए, ताकि विद्यार्थी अपनी मंजिल तक आगे बढ़ सकें। अंजुमन ख़ैरुल इस्लाम गर्ल्स हाईस्कूल, विक्रोली की प्रिंसिपल मोहतरमा शीरीन नज़ीब श़ेख ने कहा कि इंटरनेट से हमें कभी-कभी गलत जानकारी हासिल होती है, इसलिए हमेशा किताब पढ़नी चाहिए, किताब हमारे जेहन को खोलती है। किताब पढ़ने से हमारी सोच बढ़ने लगती है, नये विचार मिलते हैं व हमें आगे बढ़ने का रास्ता अपने आप ही मिल जाता है। कार्यक्रम के प्रारंभ में 'सभा' की परीक्षा अधीक्षक प्रभावती दाभोलकर ने उपस्थित सभी महानुभावों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस प्रचारक शिविर का उद्देश्य यही है कि सभी शिक्षक यानी प्रचारक एक साथ एक स्थान पर मिलें। वे अपने नये विचार, सुझाव एक दूसरे प्रचारक के साथ बाँटें तथा अपनी कक्षा की पढ़ाई में इस नये विचार को कार्यान्वित कर विद्यार्थियों का उत्तम मार्गदर्शन कर सकें। विद्यार्थियों को एक नयी दिशा की ओर लेकर चल सकें। उपस्थित सभी प्रचारकों ने अपने-अपने विचार व सुझाव प्रस्तुत किये। कार्यक्रम का संचालन ज़नाब अली अब्बास रिजवी ने किया तथा अपनी आशुकविता के माध्यम से सभी महानुभावों के प्रति आभार प्रदर्शित किया।

हिन्दी मेला

5-1-2019 को 'हिन्दुस्तानी प्रचार सभा' द्वारा संचालित मानव संसाधन विकास मंत्रालय, नई दिल्ली के सहयोग से 'हिन्दी मेला' का आयोजन किया गया। 'सभा' की विशेष कार्य अधिकारी डॉ. सुशीला गुप्ता ने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि 'मेला' यानी मिलना। हिन्दी मेले में विद्यार्थी तथा शिक्षक सभी एक साथ मिलते हैं। शिक्षक व विद्यार्थियों की साल-भर की पढ़ाई में शिक्षा का आदान-प्रदान हो जाता है, पर 'हिन्दी मेला' में मार्गदर्शन के आधार पर विद्यार्थियों को अपने विषय की अधिक जानकारी मिलती है। जनाब ज़ाकिर हुसैन ने 'सभा' द्वारा संचालित 'तीसरी' परीक्षा की पाठ्यपुस्तक 'राष्ट्रभाषा भारती' के गद्य भाग के बारे में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए सभी अध्यायों को ब्योरेवार समझाया और विद्यार्थियों की कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए उनका मार्गदर्शन किया। जनाब सऱफराज़ अहमद रिज़वी ने 'हिन्दी व्याकरण' का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि व्याकरण से ही हम भाषा की शुद्धता को समझ सकते हैं, लिख सकते हैं, पढ़ सकते हैं। उन्होंने कोर्स में सम्मिलित व्याकरण के नियमों को विस्तार से समझाया। श्रीमती संध्या पाण्डेय ने पाठ्यपुस्तक के पद्य भाग पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि पद्य यानी कविता, लय। कोई भी कविता व्यक्ति के दिल व दिमाग़ को छू जाती है। प्रत्येक कविता को मन की गहराई में उतारते हुए उसे ग्रहण करने का प्रयास करना चाहिए। श्रीमती सुवर्णा परब ने मराठी विषय में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि आप पाठ्यक्रम में दिये गये गद्य व पद्य भाग को ठीक तरह पढ़कर प्रत्येक शब्द को समझें, शब्द के अर्थ को समझें, फिर उसी को अपने शब्द व वाक्य में लिखने का प्रयास करें। परीक्षा में प्रत्येक प्रश्न को समझकर लिखिए। जनाब जव्वाद हसन धनसे ने उर्दू विषय के बारे में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि आप पाठ्यक्रम में दी गई विविध विधाओं को समझें व ख़ुद ही लिखने का प्रयास करें। परीक्षा में प्रत्येक प्रश्न को समझकर ही उसका उचित उत्तर लिखें। भाषा के शब्द को यदि उससे संबंधित पर्यायवाची शब्द को जोड़कर लिखते हैं तो भाषा अधिक सरल व ख़ूबसूरत बनती है। कार्यक्रम के प्रारंभ में 'सभा' की परीक्षा अधीक्षक प्रभावती दाभोलकर ने उपस्थित महानुभावों का स्वागत किया व 'सभा' का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि 'सभा' द्वारा संचालित 'तीसरी' परीक्षा (10वीं हिन्दी विषय के समकक्ष) है। हमारी 'सभा' में विभिन्न केन्द्राsं के विद्यार्थी इस परीक्षा में शामिल होते हैं तथा उच्च गुण लेकर सम्मानित होते हैं। इस परीक्षा में शामिल विद्यार्थियों को उनके विषय-संबंधी विद्वानों द्वारा मार्गदर्शन मिले, यही उद्देश्य इस 'हिन्दी मेला' का है। कार्यक्रम के प्रारंभ में उन्होंने सभी शिक्षकों को सम्मानित किया गया। श्री रईस अंसारी ने कार्यक्रम का संचालन किया व उपस्थित सभी महानुभावों के प्रति आभार प्रदर्शित किया।

Book Release

The second Vyngy Sangrah [collection of satires] of Sanjiv Nigam, our Director [Programme] and a prominent Hindi writer was released in the Dakshin Bhartiy Hindi Sahitya Sammelan held recently.

Seminar on Secularism

A seminar was organised on 'Secularism – Corner stone of our Democracy' in Bangalore on 27-28th December, 2018 in which 9 prominent speakers spoke on various related topics. Most of the speakers were non Hindi speaking but they conveyed their views in Hindustani or Hindi - English mix language. The participants also spoke in Hindustani. Two main speakers were Shamim Tariq, a prominent writer and journalist and Mr Babu Matthew, a prominent thinker, writer and Constitution Expert.

Literary Programme in honour of writer from Mauritius

A literary programme was organised on 8th December, 2018 in the presence of the renowned Hindi writer from Mauritius Raj Heeramun. In the first part, Raj Heeramun spoke about the language scenario in Mauritius and the position of Hindi there. In the second part, a Kavi Goshthi of Hindi–Urdu poets was organised in which around 10 poets recited their poems.