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  • हिंदी कथा साहित्य : विविध आयाम

    हिंदुस्तानी प्रचार सभा द्वारा (सन 1942 में महात्मा गाँधी द्वारा स्थापित) 9 मार्च 2019 को प्रातः 10:00 बजे से सायंकाल 6:00 बजे तक एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हो रहा है।

    • स्थल : हिंदुस्तानी प्रचार सभा, मुंबई

    उपरोक्त विषय पर बोलने के लिए प्रोफेसर गिरीश्वर मिश्र, सुश्री ममता कालिया, सुश्री रीता शुक्ला और प्रोफेसर कलानाथ मिश्र के साथ प्रोफेसर करुणाशंकर उपाध्याय, डॉ. हूबनाथ पांडेय, डॉ. सूर्यबाला लाल, सुश्री मधु कांकरिया आमंत्रित किए गए है।
    संगोष्ठी में विद्वान प्राध्यापक और जिज्ञासु शोधार्थी आमंत्रित हैं।

    प्रतिभागिता शुल्क :
    • प्राध्यापक : रु. 500/- विद्यार्थी : रु. 300/-
    • रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि : 23 फरवरी 2019.

  • महिला सशक्तीकरण : स्त्री पुरुष समानता की ओर एक कदम Registration Form

    गाँधीजी के दिल के करीब 4 मुख्य विषयों में से एक महत्त्वपूर्ण विषय महिला सशक्तीकरण के सम्बन्ध में हिन्दुस्तानी प्रचार सभा, मुंबई तथा हिंदी साहित्य सम्मलेन, तेजपुर के संयुक्त तत्त्वावधान में एक द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।

    • कार्यक्रम : 23-24 फ़रवरी 2019 [ शनिवार , रविवार ]
    • स्थल : हिंदी साहित्य सम्मेलन, तेजपुर, असम

    विषय पर अनेक विद्वान् वक्ताओं द्वारा विचार मंथन। सेमिनार में असम के बाहर से आनेवाले प्राध्यापक, शोधार्थी, समाज सेवक, पत्रकार प्रतिभागियों का स्वागत है।

    • प्रतिभागिता शुल्क : रुपए 1000/- जिसमें 23 से 24 फ़रवरी के भोजन, चाय नाश्ते की सुविधा शामिल है।
    • रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि : 15 फ़रवरी 2019.


UPCOMING EVENT

Subject:
हिंदी कथा साहित्य : विविध आयाम

हिंदुस्तानी प्रचार सभा द्वारा (सन 1942 में महात्मा गाँधी द्वारा स्थापित) 9 मार्च 2019 को प्रातः 10:00 बजे से सायंकाल 6:00 बजे तक एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हो रहा है।

  • स्थल : हिंदुस्तानी प्रचार सभा, मुंबई
Subject:
महिला सशक्तीकरण : स्त्री पुरुष समानता की ओर एक कदम

गाँधीजी के दिल के करीब 4 मुख्य विषयों में से एक महत्त्वपूर्ण विषय महिला सशक्तीकरण के सम्बन्ध में हिन्दुस्तानी प्रचार सभा, मुंबई तथा हिंदी साहित्य सम्मलेन, तेजपुर के संयुक्त तत्त्वावधान में एक द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।

  • कार्यक्रम : 23-24 फ़रवरी 2019 [ शनिवार , रविवार ]
  • स्थल : हिंदी साहित्य सम्मेलन, तेजपुर, असम
Saral Hindi Admission Form Urdu Admission Form

हिन्दुस्तानी के प्रचार-प्रसार में अग्रणी संस्था ‘हिन्दुस्तानी प्रचार सभा’ की स्थापना सन् 1942 में महात्मा गाँधी ने की थी। हिन्दुस्तानी (सरल हिन्दी) के साथ-साथ गाँधीजी के उसूलों के प्रचार-प्रसार में भी यह संस्था कार्यरत है।

‘हिन्दुस्तानी प्रचार सभा’ एक संस्था ही नहीं, एक विश्वास है, वह प्रतीक है ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘सर्वधर्म समभाव’ का। यह संस्था राष्ट्रीय एकता से जुड़ा हुआ एक इरादा है, जिसे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने ठोस आकार प्रदान किया।

इस संस्था को डॉ. राजेंद्र प्रसाद, मौलाना अबुलकलाम आज़ाद, पंडित जवाहरलाल नेहरू, डॉ. ज़ाकिर हुसैन, आचार्य काकासाहेब कालेलकर, श्री बाला साहेब खेर, डॉ. ताराचंद, डॉ. ज़ाफर हसन, प्रो. नजीब अशरफ नदवी, श्री श्रीमन्नारायण अग्रवाल, श्रीमती पेरीन बहन कैप्टन, श्रीमती गोशीबहन कैप्टन, पंडित सुन्दरलाल, पंडित सुदर्शन, श्री सीताराम सेक्सरिया, श्री अमृतलाल नानावटी, श्री देवप्रकाश नायर जैसी बड़ी-बड़ी हस्तियों का सहयोग मिला।

आचार्य काकासाहेब कालेलकर और श्री अमृतलाल नानावटी ने अहमदाबाद, वर्धा और दिल्ली को केन्द्र बनाकर अपना काम जारी रखा और श्रीमती पेरीन बहन कैप्टन ने बम्बई (मुंबई) को चुना तथा महात्मा गाँधी के भाषायी मिशन को कामयाब बनाने की कोशिश में वह लग गयी।

हिन्दुस्तानी के प्रचार-प्रसार में अग्रणी संस्था ‘हिन्दुस्तानी प्रचार सभा’ की स्थापना सन् 1942 में महात्मा गाँधी ने की थी। हिन्दुस्तानी (सरल हिन्दी) के साथ-साथ गाँधीजी के उसूलों के प्रचार-प्रसार में भी यह संस्था कार्यरत है।

‘हिन्दुस्तानी प्रचार सभा’ एक संस्था ही नहीं, एक विश्वास है, वह प्रतीक है ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘सर्वधर्म समभाव’ का। यह संस्था राष्ट्रीय एकता से जुड़ा हुआ एक इरादा है, जिसे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने ठोस आकार प्रदान किया। इस संस्था को डॉ. राजेंद्र प्रसाद, मौलाना अबुलकलाम आज़ाद, पंडित जवाहरलाल नेहरू, डॉ. ज़ाकिर हुसैन, आचार्य काकासाहेब कालेलकर, श्री बाला साहेब खेर, डॉ. ताराचंद, डॉ. ज़ाफर हसन, प्रो. नजीब अशरफ नदवी, श्री श्रीमन्नारायण अग्रवाल, श्रीमती पेरीन बहन कैप्टन, श्रीमती गोशीबहन कैप्टन, पंडित सुन्दरलाल, पंडित सुदर्शन, श्री सीताराम सेक्सरिया, श्री अमृतलाल नानावटी, श्री देवप्रकाश नायर जैसी बड़ी-बड़ी हस्तियों का सहयोग मिला। आचार्य काकासाहेब कालेलकर और श्री अमृतलाल नानावटी ने अहमदाबाद, वर्धा और दिल्ली को केन्द्र बनाकर अपना काम जारी रखा और श्रीमती पेरीन बहन कैप्टन ने बम्बई (मुंबई) को चुना तथा महात्मा गाँधी के भाषायी मिशन को कामयाब बनाने की कोशिश में वह लग गयी।


हिन्दुस्तानी ज़बान

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January - March 2019

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