विदेशियों के लिए हिन्दी कक्षा

‘हिन्दुस्तानी प्रचार सभा’ द्वारा विदेशियों के लिए हिन्दी-शिक्षण की व्यवस्था की गयी है। जून 1997 में ये कक्षाएँ शुरू की गयीं हैं। सप्रति इस योजना के अन्तर्गत प्रथम, द्वितीय औरतृतीय वर्ष की पढ़ाई होती है। विश्व के विभिन्न देशों श्रीलंका, यू.के., यू.एस.ए., फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, चिली, पोलैण्ड, डेनमार्क, आयरलैंड, इटली, कैनेडा, कोरिया, ऑस्ट्रिया, ऑस्ट्रेलिया,दक्षिण अ़फ्रीका, मॉरीशस इत्यादि के विद्यार्थी इस कक्षा का लाभ उठाते हैं। यह सुविधा विभिन्न वाणिज्य- दूतावासों और अन्य प्रतिष्ठानों में कार्यरत विदेशियों के लिए मुख्य रूप सेउपलब्ध है।

यह पाठ्यक्रम अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। अनेक वाणिज्य दूतावासों का ‘सभा’ के साथ सम्पर्क बना रहता है। वहाँ पर कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी इसकक्षा की ओर सहज ही आकर्षित होते हैं। अन्य विदेशी नागरिकों के बीच भी यह पाठ्यक्रम अत्यंत लोकप्रिय है। ई-मेल द्वारा भी विदेशों से पत्र प्राप्त होते रहते हैं, जिनमें हिन्दी कक्षाकी विस्तृत जानकारी के लिए निवेदन होते हैं। विदेशियों के लिए हिन्दी कक्षा के शिक्षण हेतु विद्यार्थियों से 1000 रुपये की राशि प्रति वर्ष प्रवेश-शुल्क के रूप में निर्धारित की गयी है।

अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत पाठ्यपुस्तक ‘टीच योरसेल्फ हिन्दी’ (लेखक : मि. रूपर्ट स्नेल और मि. साइमन वेटमैन) उपरोक्त कक्षा के लिए निर्धारित की गयी है। विद्यार्थियों कीवक्तृत्व-क्षमता विकसित करने के लिए डॉ. सुशीला गुप्ता कृत पुस्तक ‘A Handbook on conversational Hindi’ का कक्षा में उपयोग होता है। इसके अतिरिक्त डॉ. सुशीला गुप्ताकृत पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी-पथ’ का संदर्भ-पुस्तक के रूप में उपयोग होता है। विदेश में भी यह पाठ्यक्रम प्रारम्भ करने की योजना विचाराधीन है।