मंदिर बापू के ख्वाबों का
बाग़ीचा कोई गुलाबों का
ठंडा-सा ख़ुशबू का झोंका
अँधियारे में जैसे दिया
हिन्दुस्तानी प्रचार सभा॥

यह इल्म-ओ-अदब का इक गुलशन
मानवता का जगमग आँगन
जहाँ दिल में प्यार के ख़्वाब पलें
तहज़ीब के सच्चे दीप जलें।
ले जनम जहाँ ख़ुशबूए वफा
हिन्दुस्तानी प्रचार सभा॥

हिन्दी अपनी उर्दू अपनी
हर भाषा की ख़ुशबू अपनी
मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा
गिरजाघर हमको प्यारा।
गुलज़ार ये क़ौमी एका का
हिन्दुस्तानी प्रचार सभा॥

आबाद हैं आँखें ख़्वाबों से
झाँके इतिहास किताबों से
यह ज्ञान व खोज का रखवाला
धरती पे नूर का मीनारा
दिखलाये मंज़िल का रास्ता
हिन्दुस्तानी प्रचार सभा॥

सूरज अपना अम्बर अपना
सारी धरती है घर अपना
धरती को स्वर्ग बनाना है
बापू की राह पे चलना है
बापू की यह अमर कथा
हिन्दुस्तानी प्रचार सभा॥