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हिन्दुस्तानी प्रचार सभा

Hindustani Prachar Sabha

7, Netaji Subhash Road, Charni Road (West), Mumbai – 400 002

7208525985/9820129917

hps.sabha@gmail.com

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7, Netaji Subhash Road, Charni Road (West),
Mumbai – 400002
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RECENT PUBLICATIONS
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प्रत्येक बालकाशी संबंधित
लैंगिक अत्याचारापासून बालकांचे संरक्षण कायदा
(पोक्सो कायदा) : कृती आणि जबाबदारी
शाळांसाठी मार्गदर्शक पुस्तिका
डॉ. रुक्षेदा सैय्यदा / डॉ. अलका सुब्रमणियम
मूल्य : ७५/-
पहिली आवृत्ती: २०२५

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प्रत्येक बच्चा महत्त्वपूर्ण है
POCSO अधिनियम: कार्रवाई और जवाबदेही
स्कूलों के लिए एक व्यावहारिक पुस्तिका
डॉ. रुक्षेदा सैय्यदा / डॉ. अलका सुब्रमणियम
मूल्य : रुपये 75/-
प्रथम संस्करण : 2025

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Every Child Matters
POCSO Act : Action and Accountability
–—A Practical Handbook for Schools
Dr Ruksheda Syeda
Dr Alka A Subramanyam
Prize: Rs.75/-
First Edition: 2025

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  • All India Hindi Essay Competition Topic: Will India ever become a developed country, or will it always remain a developing country?
    Results:
    List of students selected for interview are given below
    1. Ms. Sakshi Tiwari, Gonda, UP
    2. Mr. Mohd. Jeeshan, Barelly, UP
    3. Mr. Soham Bhandarkar, Dhuliya, MH
    4. Ms. Sakshi Dhure, Kolhapur, MH
    5. Ms. M. Adyasha Priyadarshini, Rourkela, Odisha
    6. Ms. Pratibha Gangwar, Pilibhit,UP
    7. Ms. Riti Kumari, Marcela, Goa
    8. Ms. Pragya, Lucknow, UP
    9. Ms. Sheetal, Badayun, UP
    10. Mr. Praveen Kumar Tripathi, Banda, UP
    11. Ms. Chinmayee Sahoo, Kendrapur, Odisha
    12. Ms. Supriya Ojha, Agra, UP
  • Books on POCSO Act in three languages — English, Hindi, and Marathi — are ready for purchase.
  • Opening of libraries in 15 Central Prisons of Tamil Nadu is in process.
  • Opening of libraries in various Central and District Prisons in Maharashtra is in process.
  • Quarterly magazine “Hindustani Jaban” (Hindi & Urdu) published.
  • Saral Hindi Classes have been started in 23 colleges across Mumbai and Maharashtra.
  • Dictionary Distribution Programme in Adivashi Ashram Shalas is ongoing.

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Essay Competition Result 2025-2026
List of students selected
for interview are given below

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Essay Competition Result 2025-2026
List of students selected
for interview are given below

  1. Ms. Sakshi Tiwari, Gonda, UP
  2. Mr. Mohd. Jeeshan, Barelly, UP
  3. Mr. Soham Bhandarkar, Dhuliya, MH
  4. Ms. Sakshi Dhure, Kolhapur, MH
  5. Ms. M. Adyasha Priyadarshini, Rourkela, Odisha
  6. Ms. Pratibha Gangwar, Pilibhit,UP
  7. Ms. Riti Kumari, Marcela, Goa
  8. Ms. Pragya, Lucknow, UP
  9. Ms. Sheetal, Badayun, UP
  10. Mr. Praveen Kumar Tripathi, Banda, UP
  11. Ms. Chinmayee Sahoo, Kendrapur, Odisha
  12. Ms. Supriya Ojha, Agra, UP

केन्द्रीय जेलों मे पुस्तकालय

हिन्दुस्तानी प्रचार सभा की विशेष परियोजना :
अभी तक देश के 17 राज्यों की 118 जेलों में कैदियों के लिए पुस्तकालयों की स्थापना।


Know More

हिन्दुस्तानी प्रचार सभा

हिन्दुस्तानी के प्रचार-प्रसार में अग्रणी संस्था ‘हिन्दुस्तानी प्रचार सभा’ की स्थापना सन् 1942 में महात्मा गाँधी ने की थी। हिन्दुस्तानी (सरल हिन्दी) के साथ-साथ गाँधीजी के उसूलों के प्रचार-प्रसार में भी यह संस्था कार्यरत है।

‘हिन्दुस्तानी प्रचार सभा’ एक संस्था ही नहीं, एक विश्वास है, वह प्रतीक है ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘सर्वधर्म समभाव’ का। यह संस्था राष्ट्रीय एकता से जुड़ा हुआ एक इरादा है, जिसे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने ठोस आकार प्रदान किया।

इस संस्था को डॉ. राजेंद्र प्रसाद, मौलाना अबुलकलाम आज़ाद, पंडित जवाहरलाल नेहरू, डॉ. ज़ाकिर हुसैन, आचार्य काकासाहेब कालेलकर, श्री बाला साहेब खेर, डॉ. ताराचंद, डॉ. ज़ाफर हसन, प्रो. नजीब अशरफ नदवी, श्री श्रीमन्नारायण अग्रवाल, श्रीमती पेरीन बहन कैप्टन, श्रीमती गोशीबहन कैप्टन, पंडित सुन्दरलाल, पंडित सुदर्शन, श्री सीताराम सेक्सरिया, श्री अमृतलाल नानावटी, श्री देवप्रकाश नायर जैसी बड़ी-बड़ी हस्तियों का सहयोग मिला।

आचार्य काकासाहेब कालेलकर और श्री अमृतलाल नानावटी ने अहमदाबाद, वर्धा और दिल्ली को केन्द्र बनाकर अपना काम जारी रखा और श्रीमती पेरीन बहन कैप्टन ने बम्बई (मुंबई) को चुना तथा महात्मा गाँधी के भाषायी मिशन को कामयाब बनाने की कोशिश में वह लग गयी।


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अखिल भारतीय हिन्दी निबंध प्रतियोगिता 2025-26

'हिन्दुस्तानी प्रचार सभा' द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर विद्यार्थियों के लिए आयोजित पेरीनबेन कैप्टन अखिल भारतीय हिन्दी निबंध प्रतियोगिता (विषय : क्या भारत कभी विकसित देश बनेगा या हमेशा विकासशील देश ही रहेगा।) आयोजित की गई। दिनांक 12 फरवरी 2026 को तीन निर्णायकों द्वारा साक्षात्कार के उपरांत 13 फरवरी 2026 को पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। 16 राज्यों से 480 निबन्ध प्राप्त हुए जिनमें से 12 का चयन किया गया, निबंधों को जांचने व साक्षात्कार की ज़िम्मेदारी डॉ. सुनीता मिश्रा, डॉ. रमा सिंह व डॉ. वैसाली पाचुंदे ने निभायी।
न्यासी व कोषाध्यक्ष श्री अरविंद डेगवेकर ने विद्यार्थीयों को सभा की गतिविधियों की जानकारी साझा की तथा उनका उत्साहवर्धन किया। निर्णायक में डॉ. सुनीता मिश्रा तथा डॉ. वैशाली पाचुंदे ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए भविष्य की उज्जवल कामना दी।
प्रतियोगिता में सोहम अनिल भंडारकार, धुलिया, महाराष्ट्र पुरस्कार, सुश्री सुप्रिया ओझा, आगरा, को द्वितीय व सुश्री रीति कुमारी, गोवा को तृतीय पुरस्कार के रूप में क्रमशः रु.15,000/-, रु.12,000/- और रु.10,000/- तथा रु.3000/- का तीन प्रोत्साहन पुरस्कार सुश्री प्रज्ञा, लखनऊ, सुश्री एम. अद्यशा प्रियदर्शिनी, राऊरकेला, उड़ीसा तथा प्रवीण कुमार त्रिपाठी बांदा, उत्तरप्रदेश को प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ. रीता कुमार (विशेष कार्य अधिकारी) ने कार्यक्रम की भूमिका बताई, राकेश कुमार त्रिपाठी, परियोजना समन्वयक ने निर्णायकों का परिचय देते कार्यक्रम का संचालन तथा पुरस्कारों की घोषणा की।

अंतर्महाविद्यालयीन प्रतियोगिताओं का आयोजन

कोयंबत्तूर. अविनाशी रोड स्थित पीएसजी कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस के हिंदी विभाग और हिंदुस्तानी प्रचार सभा, मुंबई के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को हिंदी भाषण और निबंध लेखन आदि अंतर्महाविद्यालयीन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। पोदिगै सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में पारंपरिक रूप से प्रार्थना और दीप प्रज्ज्वलन के बाद स्वागत भाषण देते हुए हिंदी विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ. जी. रेणुका ने कहा कि इस आयोजन में 15 महाविद्यालयों के करीब 200 विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। ऐसे आयोजन हिंदी के विकास के साथ-साथ देश की अन्य क्षेत्रीय भाषाओं और विविध संस्कृतियों को भी मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अध्यक्षीय भाषण देते हुए प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. एम. सेंगुट्टुवन ने कहा कि वर्तमान समय में हिंदी के साथ-साथ देश की अन्य भाषाओं को भी प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत है। इस तरह के आयोजन इस दिशा में एक सार्थक कदम साबित हो सकते हैं। मुख्य अतिथि एवं राजस्थान पत्रिका चेन्नई के संपादक डॉ. पी.एस. विजयराघवन ने कहा कि भाषा हमें जोड़ने का काम करती है। सही ढंग से किसी भाषा को सीखने के लिए उसे सुनना बहुत जरूरी है। सुनने से हमारा शब्द भंडार तो बढ़ता ही है साथ ही साथ हमें अपने विचारों को सही ढंग से अभिव्यक्त करने में भी मदद मिलती है। हिन्दुस्तानी प्रचार सभा के परियोजना समन्वयक राकेश कुमार त्रिपाठी ने कार्यक्रम की विविधता और उसके उपयोग के साथ हिंदुस्तानी प्रचार सभा, मुंबई की ओर से संचालित विविध कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला और प्रतिभागियों के उज्जवल भविष्य की कामना के साथ सभी विद्यार्थियों को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. कुंवर संजय विक्रम सिंह और धन्यवाद ज्ञापन सहायक प्राध्यापक गौरव सिंह ने किया। सहायक प्राध्यापक डॉ. अर्चना त्रिपाठी ने प्रतिभागियों को प्रतियोगिता के नियमों के बारे में विस्तार से समझाया। सहायक प्राध्यापक डॉ. सतीश कुमार श्रीवास्तव एवं महाविद्यालय के विद्यार्थियों का भी सराहनीय योगदान रहा।

महात्मा गाँधी हिन्दी शिक्षा प्रतिभा सम्मान 2025

स्वतंत्रत दिवस भारत का एक दिन का समारोह नहीं बल्कि गर्व व स्वाभिमान का दिन है। हिन्दुस्तानी प्रचार सभा द्वारा स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पूर्व हिन्दीतर भाषी शिक्षकों के स्वाभिमान व सम्मान का दिन रहा। हिन्दी शिक्षा के क्षेत्र में योगदान तथा समर्पण को देखते हुए महाराष्ट्र्, गोवा, कोयम्बटूर, केरल, तमिलनाडु तथा पॉन्डिच्चेरी के शिक्षकों को ''महात्मा गाँधी हिन्दी शिक्षा प्रतिभा सम्मान'' से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में नवभारत टाईम्स के संपादक कप्तान सुंदर चंद ठाकुर ने विद्यार्थियों तथा शिक्षकों में भारत के अतुलनीय गौरव और वर्तमान तथा सुंदर भविष्य की कल्पना को साकार करने की ओर प्रेरित किया। सभा के न्यासी व मानद कोषाध्यक्ष श्री अरविंद डेगवेकर ने सभा के भविष्य की परिकल्पना तथा उसकी उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। विशेष कार्य अधिकारी डॉ. रीता कुमार तथा परियोजना समन्वयक राकेश कुमार त्रिपाठी ने कार्यक्रम का संचालन किया व सूत्रधार की भूमिका निभायी। कार्यक्रम के अंत में देवमणि पाण्डेय के संयोजन में कवि सम्मेलन भी आयोजित किया गया। श्री विनोद दुबे, रोशनी किरण तथा दमयंती शर्मा ने अपनी कविताओं और गजलों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। महाविद्यालयों से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया।

आदिवासी साहित्य और उसकी चुनौतियाँ

हिंदुस्तानी प्रचार सभा, मुंबई के नये शैक्षणिक सत्र काआगाज़। एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी से। विषय : 'आदिवासी साहित्य और उसकी चुनौतियाँ'। इसकी प्रस्तावना दी 'हिं प्र स' की विशेष कार्याधिकारी व 'हिंदुस्तानी ज़बान' पत्रिका की संपादक डॉ रीता कुमार ने। सभा के ट्रस्टी व मानद सचिव श्री फिरोज़ पैच ने अपने स्वागत वक्तव्य में 'धरा पर बसे आदिवासियों की पहली मलकियत' पर प्रकाश डाला। बाकी हम सब तो विस्थापित हुजूम हैं। स्वार्थी और चतुर। खुद को पुनः स्थापित करने के लिए हमने आदिवासियों के संसाधनों को हथियाना शुरू किया। परिणाम एक अबूझी पहेली बन कर रह गया। स्थापित विस्थापित हो गये और हम---! यही है यथार्थ!! संगोष्ठी के मुख्य अतिथि श्री संतोष चौबे, प्रथम सत्र के अध्यक्ष डॉ करुणाशंकर उपाध्याय, द्वितीय सत्र के अध्यक्ष डॉ दामोदर खडसे ने सभी प्रबुद्ध वक्ताओं के वक्तव्यों से सहमति जताई और यह स्वीकार किया कि आदिवासियों की मार्मिक अनुभूतियाँ तो वे स्वयं ही समझते हैं क्योंकि वे ही झेलते हैं। हम तो रखते हैं सिर्फ सहानुभूति; कुछ सुनकर कुछ पढ़कर। और चला देते हैं कलम। बन जाते हैं उनके मसीहा। "हमें मसीहा नहीं, सहयोगी चाहिए।" पीड़ायुक्त स्वाभिमानी दृढ़ता थी आदिवासी सुश्री वंदना टेटे की वाणी में। पर्यावरण की महत्ता में उन्होंने आदिवासी बोली में एक मधुर गीत भी सुनाया। आदिवासी प्रो डॉ विनोद कुमरे ने 'जय जोहार' अर्थात 'सबका कल्याण करनेवाली धरती की जय हो' के साथ अपना वक्तव्य शुरू किया। पर्यावरण से प्रेम और उसकी रक्षा ही आदिवासियों कि परम धर्म है।और यही इतर लोगों का भी होना चाहिए। पर 'मुनाफ़ा' और 'संचय' की आपाधापी में पूँजीवादी उसका हनन करने में जुटे हैं। यह प्रहार है आदिवासियों की जीविका पर, उनकी जीवन शैली पर, उनकी आस्था पर। ऐसे में उन्हें अपने अस्तित्व और जिजीविषा की चिंता होना स्वाभाविक है। और उसके खिलाफ़ आवाज़ उठाना उनका अधिकार। आदिवासी श्री अविनाश पोईनकर ने जोशीली वाणी में आदिम आदिवासी से अपनी बात शुरू करते हुए यह मुद्दा उठाया कि एक शिक्षित आदिवासी जो विस्थापित होकर मुख्य धारा में मिल चुका है उसके पास अब भाषा है, अपनी स्थिति को व्यक्त करने के लिए; पर उन 'ख़ालिस' अनपढ़ आदिवासियों का क्या जिनकी बोली भी उनकी अपनी नहीं रही। वह विलुप्त हो गयी, राजनीतिक दाँव-पेच में। ऐसे में उनके ऑरेचर् (वाचिक) साहित्य का हश्र क्या? वे जैसे-तैसे सँभाले हुए हैं अपने हुनर को, कला-कौशल को, ज्ञान को, पर कब तक? सुश्री मधु कांकरिया जो कई वर्ष आदिवासी क्षेत्रों में रहीं, उन्होंने अपने परोक्ष अनुभवों को साझा किया। आदिवासी समुदाय जो हर तरह की प्राकृतिक संपदा से संपन्न है, वह इतना दीन-दुखी क्यों? उत्तर स्पष्ट है--- भुमंडलीकरण और बाजारवाद की मार! पूरा सच कोई जानना चाहता है तो वह जाए और रहे उनके साथ वर्षों तक, उनकी तरह। सिर्फ़ पर्यटक बनकर जाने से आप आदिवासी साहित्यकार नहीं बन सकते। संगोष्ठी का जितना वृहद् और नाज़ुक विषय उतनी गहन और समृद्ध विद्वान वक्ताओं की संवेदना। बात आदिवासियों के स्वामित्व की जो थी। उनका अतीत, वर्तमान और भविष्य। यानि आदिवासी-विमर्श के विविध आयाम। डॉ जवाहर कर्नावट ने पत्रकार की हैसियत से लिए आदिवासी संबंधित साक्षात्कारों पर प्रकाश डाला और इस तथ्य को सराहा कि आदिवासी बोलियों और भाषाओं, बल्कि सभी भाषाओं, का संरक्षण उस क्षेत्र की संस्कृति जानने के लिए ज़रूरी है। आदिवासी संस्कृति के भविष्य की बात की डाॅ हूबनाथ पांडेय ने। और डाॅ बजरंग बिहारी तिवारी ने पूर्व आधुनिक हिंदी साहित्य में आदिवासी पात्रों पर बात करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि वे तब भी मुख्य धारा से संबंधित थे और आज भी हैं। हाँ तौर-तरीके बदल सकते हैं। बात जब आदिवासी साहित्य की थी तो संबंधित भ्रामक विचारों का निवारण भी ज़रूरी था। जैसे : आदिवासी साहित्य किसे कहें? आदिवासी साहित्यकारोंं द्वारा रचा साहित्य, आदिवासी साहित्यकारों द्वारा आदिवासियों पर रचा साहित्य या गैर आदिवासी साहित्यकारों द्वारा आदिवासियों पर रचा साहित्य। तर्क अनेकों। श्री भालचंद्र जोशी ने आदिवासी जीवन के यथार्थ को सामने रखकर उनके द्वारा रचे गये तमाम साहित्य का उल्लेख भी किया। कार्यक्रम का संचालन राकेश कुमार त्रिपाठी बहुत सतर्कता से करते रहे। यह तो थी संक्षेप में मंच की बात। मंच के सामने का दृश्य तो और भी लुभावना। कनिष्ठ महाविद्यालयों के हिंदी प्रेमी विद्यार्थियों का टोला, अपने शिक्षकों के साथ। ऐसा प्यारा दृश्य बहुत कम दिखता है। यानि सभागृह के बाहर तक युवा श्रोता। फिर कैसे कोई माने कि हिंदी नयी पीढ़ी पर अपना वर्चस्व खोती जा रही है। डॉ रीता कुमार ने प्रस्तावना में कहा कि, "ऐसी संगोष्ठियों के पीछे मेरा मकसद यही है कि हमारे सामने बच्चे बैठे हों।" और वे थे। अंत तक। उसी तादाद में। पूरे कार्यक्रम की व्यवस्था अति उत्तम। श्रोताओं के रूप में वरिष्ठ साहित्यकारों से सजे उस माहौल में हर कोई मुग्ध।

अच्छा मानसिक स्वास्थ्य : सफलता और खुशी की कुंज

हिन्दुस्तानी प्रचार सभा तथा बॉम्बे साइकियाट्रिक सोसाइटी के संयुक्त तत्वाधान में दिनांक 1 ऑक्टोबर 2024 को चर्चगेट स्थित इंडियन मर्चेंट चैंबर में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. हरीश शेट्टी ने जीवन की आवश्यक जरूरतों के बारे में बताते हुए हर छोटी-छोटी बातों पर बच्चों के बदलते मनोविज्ञान के विषय में जागरूक किया। सभा के न्यासी व मानद सचिव श्री फिरोज पैच ने मानव जीवन के बदलते मूल्यों के बारे में अपने विचार रखे । बाम्बे साइकियाट्रिक सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. रुक्षेदा सैय्यदा ने विद्यार्थियों के इमोशन, फीलिंग के संबंध में अनेक पहलुओं पर चर्चा की और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के विषय में बताते हुए पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
डॉ. मानसी जैन ने बेहतर आत्म छवि और आत्मसंवाद के साथ ही दैनिक जीवन में अधिक सोचने, काम को टालने और परीक्षा की घबराहट से उबरने के तरीके के बारे में विद्यार्थियों से अपने अनुभव साझा किए। डॉ. प्रियंका महाजन ने जीवन में सही निर्णय लेना और नशीले पदार्थों को ना कहने की आदत को लाने की बात की तथा विद्यार्थियों के भीतर उठते द्वन्द्व के कारण हर छोटी बातों पर अपने आपको समाप्त करने (सुसाइड) जैसी अव्यावहारिक परिस्थियों से निपटने कि स्थिति को समझने व जीवन को बेहतर मार्ग पर ले जाने के तरीके को बताया।, सुश्री मेहजबीन डोरडी, डॉ. किरण जठार व डॉ. संतोष कौल काक ने पैनल वार्ता में विद्यार्थियों से कॉलेज और उससे आगे के निर्णयों के साथ ही जीवन में आने वाली समस्याओं को समझने और उन्हें लिखकर उसपर विचार करने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया साथ ही जीवन कि उन तमाम परिस्थितियों जिसे वे समस्या या कठिनाई मानते हैं उसके अंतर को समझकर उसका निराकरण कर सकें उन बातों को साझा किया जिसका मॉडरेशन डॉ. अल्केश पाटील ने किया। डॉ. नाहिद दवे ने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को लेकर अपनी चिंता प्रकट करते हुए विद्यार्थियों को उससे निपटान के कुछ उपाय साझा किए।
कार्यक्रम का संचालन सभा की विशेष कार्य अधिकारी डॉ. रीता कुमार ने तथा आभार ज्ञापन सभा के परियोजना समन्वयक राकेश कुमार त्रिपाठी ने किया। सभागार में 300 से अधिक विद्यार्थियों व शिक्षकों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग दिया व अपना ज्ञानार्जन किया।