भाषाई एकता कहलाने वाला उत्सव “विश्व हिन्दी दिवस” पांडिच्चेरी विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग, हिन्दी अनुभाग और हिन्दुस्तानी प्रचार सभा, मुंबई तथा नॉटनल, लखनऊ के संयुक्त तत्तावधान में 10-11 जनवरी 2024 को आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति (प्रभारी) आचार्य के.तरणिक्कारसु द्वारा समारोह के मुख्य अतिथि श्री श्रीकांत करूणेश, शैक्षणिक सलाहकार, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, श्री राकेश कुमार त्रिपाठी, परियोजना समन्वयक, हिन्दुस्तानी प्रचार सभा, मुंबई, श्री नीलाभ श्रीवास्तव, नोटनल, ईबुक प्लेटफार्म, लखनऊ, हिन्दी विभाग की आचार्या एवं विभागाध्यक्षा, सह-आचार्य, हिन्दी अधिकारी, अन्य विश्वविद्यालयों से पधारें दिग्गजनों, साहित्यकारों तथा छात्र-छात्राओं की उपस्थिति में दीपप्रज्वलन के साथ द्वि-दिवसीय कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत कर वैश्विक स्तर पर हिन्दी को बढ़ावा देने तथा दुनियाभर के तमाम देशों में बसे भारतीयों को एक सूत्र में बांधने हेतु सरकार की इस पहल की सराहना करते हुए हिन्दी दिवस की शुभकामनाएँ प्रदान की।
इस अवसर पर “कृत्रिम मेधा की भूमिका एवं महत्व” विषय पर आयोजित अंतरमहाविद्यालयीन वाक्-स्पर्धा में पांडिच्चेरी विश्वविद्यालय और अन्य विश्वविद्यालयों के लगभग 63 विद्यार्थियों ने गूगल फॉर्म द्वारा पंजीकरण किया और 45 विद्यार्थियों ने इसमें वक्तव्य दिया जिन्हें प्रथम, द्वितीय, तृतीय और 3 प्रोत्साहन पुरस्कारों से सम्मानित किया गया जिसकी निर्धारित राशि क्रमश: 5,000/-, 4,000, 3,000/- एवं 1,000/- रुपयें थी।
इसी क्रम में पांडिच्चेरी विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में उपर्युक्त विषय पर ही राष्ट्रीय संगोष्ठी के 4 सत्रों का भी आयोजन किया गया, जिसमें डॉ. शशि मुदिराज, हैदराबाद; प्रो. लता चौहान, बेंगलूर; प्रो.राम प्रकाश ,तिरुपति; डॉ.गजेंद्र पाठक, हैदराबाद; डॉ. निशा,पांडिच्चेरी; डॉ. उमा देवी, पांडिच्चेरी; डॉ.जगनाथ रेड्डी, चिदंबरम; डॉ. सुरेंद्रन, पांडिच्चेरी; डॉ. आशिता,पांडिच्चेरी; डॉ. ए. राधिका, पांडिच्चेरी; डॉ. अनिता सिंह, पांडिच्चेरी, डॉ. राजरत्नम,तिरुवारुर; श्री विनय ठाकुर, पांडिच्चेरी जैसे विद्वजनों तथा जेआरएफ शोधार्थियों ने अपने प्रपत्रों का वाचन किया। पांडिच्चेरी विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रभारी आचार्य रजनीश भूटानी, डॉ. अरविन्द गुप्ता, निदेशक, दूरस्थ शिक्षा, डॉ