हिन्दुस्तानी प्रचार सभा द्वारा आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “महिला उद्यमशीलता : संभावनाओं का अनंत आकाश” में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री सत्यरंजन सी. धर्माधिकारी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “संवादों के माध्यम से ही उद्यमशीलता आगे बढ़ेगी। हमें बुनियादी शिक्षा को आत्मसात करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को स्वीकार करना होगा और उसके साथ सामंजस्य बनाकर कार्य करना होगा।” कार्यक्रम की प्रस्तावना एवं स्वागत वक्तव्य सभा के न्यासी व कोषाध्यक्ष श्री अरविंद डेगवेकर ने प्रस्तुत किया।
संगोष्ठी के प्रथम सत्र की अध्यक्षता सुश्री वर्षा विद्या विलास ने की। इस सत्र में सुश्री प्रेरणा देसाई ने “गाँधीजी और महिला नेतृत्व”, सुश्री दीपा राउत ने “महिला उद्यमशीलता और डिजिटल जागरूकता”, गुजरात से पधारे डॉ. राजेंद्र खिमाणी ने “महिला शिक्षा और एनजीओ की भूमिका” तथा गुजरात से ही सेवा की उपाध्यक्ष सुश्री हीना बेन दवे ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
द्वितीय सत्र की अध्यक्षता डॉ. हूबनाथ पाण्डेय एवं सभा की कार्यकारिणी सदस्य डॉ. उषा मिश्रा ने संयुक्त रूप से की। इस सत्र में डॉ. नेहा मिश्रा ने “आइडिया से इम्पैक्ट तक : महिला उद्यमिता का नया दौर”, प्रो. डॉ. मृगेंद्र राय ने “वैश्वीकरण के युग में नारी के बढ़ते कदम” तथा डॉ. ममता झा ने “स्त्री की धुरी पर कला और उद्यमशीलता” विषय पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. रीता कुमार ने किया। संगोष्ठी का संचालन सभा के परियोजना समन्वयक राकेश कुमार त्रिपाठी एवं गंगाशरण सिंह ने किया। इस अवसर पर मुंबई तथा आसपास के महाविद्यालयों के अनेक विद्वानों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।